Poetry, Ramyantar

एक आदमी, एक गुरु- हाँ, हाँ, ना,ना

मैंने तुम्हें औरतों से बतियाते कभीं नहीं देखा और न ही -मर्दों से ऐसा सुना- किसी औरत ने बड़ी अदब से तुम्हारा नाम लिया अक्सर उन औरतों से जिनका पैर तुम छूते रहे हो (अब तुम्हें क्यों इसकी जरूरत पड़ीं,नहीं…

Poetry, Ramyantar

अनुभव: कुछ सन्दर्भ

एक बाग़ है अनुभव का उसमें खिले हैं कुछ फूल ये फूल बरसों का निदाघ झेल कर बड़े हुए ये फूल समय के शेष नाम हैं । अनुभव का अपना एक पूरा आकाश है उस आकाश में उगा है एक…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

समय पखेरू है भागते समय को पकड़ो

अमेरिकी दार्शनिक कवि इमरसन (Ralph Waldo Emerson) का एक प्रसंग पढ़ रहा था । समय की अर्थवत्ता को ध्वनित करता यह प्रसंग बहुत दूर तक प्रासंगिक लगा। कविता का संस्कार है। अपने छोटे से भतीजे को ग्राह्य बनाने हेतु उस…

Poetry, Ramyantar

क्यों?

क्यों? खो गए हो विकल्प में, चर्चित स्वल्प में विस्मृत सुमधुर अतीत क्यों लेकर चलते हो बेगाना गीत स्वर्ग की ईच्छा क्यों छोड़ दी तुमने आख़िर अनसुलझी, अस्तित्वविहीन अनगिनत कामनाओं की डोर क्यों जोड़ दी तुमने आख़िर क्यों बहक जाते…

Ramyantar

सच्चा की सच्ची पुकार: प्रभु आप जगो

अभी सुबह नहीं हुई है, पर जाग गया हूँ। एक अनोखी पुकार मन को वर्षों से आकर्षित करती रहती है- उसी को गुनगुना रहा हूँ- जगा रहा हूँ ईश्वर को या फिर अपने आप को, पता नहीं। इस पुकार को…

Article on Authors, Ramyantar, आलेख

नामवर सिंह को समझते हुए

बताना जरूरी है कि नामवर सिंह के व्यक्तित्व-कृतित्व की ऊँचाई मुझ जैसे अल्पज्ञानी से काफी अधिक बैठती है। काफी तैयारी से लिख कर बोला था, वही लिख रहा हूँ -इस आशा से कि यदि पढ़ें इसे आप तो मुझे संज्ञान…

Literary Classics, Ramyantar

रघुवीर सहाय की कविता से सबक लेकर

ठीक ठीक ब्लॉग लिखना शुरू करने के पहले मेरे एक ब्लॉगर मित्र ने मुझे कुछ उलाहने दिए। रघुवीर सहाय की पंक्तियों को उद्धृत कर सारांश दे रहा हूँ – “उसने पहले मेरा हाल पूछा एकाएक विषय बदलकर कहा आजकल का…