Article | आलेख, Hindi Blogging

मस्ती की लुकाठी लेकर चल रहा हूँ

A leaf  (Photo credit: soul-nectar) मैं यह सोचता हूँ बार-बार की क्यों मैं किसी जीवन-दर्शन की बैसाखी लेकर रोज घटते जाते अपने समय को शाश्वत बनाना चाहता हूँ? क्यों, यदि सब कुछ क्षणभंगुर है तो उसे अपनी मुट्ठियों में भर…

Poetry, Ramyantar

दर्द सहता रहा उसे ..

दर्द सहता रहा उसे, सहता है अब तलक। दर्द ने अपनी हस्ती भर उसे चाहा उसकी शिराओं, मांसपेशियों से होते- होते उसके मस्तिष्क, उसके हृदय तक अपनी पैठ बना ली, तब उसने इस दर्द को अपना नाम ही दे दिया।…

Article | आलेख, General Articles

आज मैं एक बार फ़िर हँसा

आजकल मुझे हंसी बहुत आती है, सो आज मैं फ़िर हँसा। अब ‘ज्ञान जी’ की प्रविष्टियों का ‘स्मित हास’, ‘ताऊ’ की प्रविष्टियों का ‘विहसित हास’, आलोक पुराणिक की प्रविष्टियों का ‘अवहसित हास’ भी बार-बार मुझे मेरी हंसी की याद दिला…

Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

मैं सपनों का फेरीवाला

मैं सपनों का फेरीवाला, मुझसे सपन खरीदोगे क्या ? यह सपने जो चला बेचने, सब तेरे ही दिए हुए हैं, इन सपनों के चित्र तुम्हारी यादों से ही रंगे हुए हैं; मैं प्रिय-सुख ही चुनने वाला,मुझसे चयन खरीदोगे क्या? कहाँ…

Hindi Blogging, Ramyantar

एक ब्लॉग टिप्पणी की आत्मकथा

मैं एक ब्लॉग टिप्पणी हूँ। अब टिप्पणी ही हूँ तो कितना कहूं। उतना ही न जितना प्रासंगिक हो, तो इतना कह लेती हूँ शुरू शुरू में कि मैं ब्लॉग प्रविष्टि से अलग हूँ। अलग इस अर्थ में कि मुझे देख…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

वह ख़त नहीं, दस्तख़त था

एक कागज़ तुम्हारे दस्तख़त का मैंने चुरा लिया था, मैंने देखा कि उस दस्तख़त में तुम्हारा पूरा अक्स है। दस्तख़त का वह कागज़ मेरे सारे जीवन की लेखनी का परिणाम बन गया। मैंने देखा कि अक्षरों के मोड़ों में जिंदगी…

Love Poems, Poetic Adaptation, Ramyantar

तेरी याद आ गयी होगी

प्रेम पत्रों का प्रेम पूर्ण काव्यानुवाद: चार A Close Shot of Handwritten Love-Letters आँखों से आँसू बह आया, तेरी याद आ गयी होगी। घबराना मत यह आँसू ही कल मोती बन कर आयेंगे विरह ताप में यह आँसू ही मन…

Essays, General Articles

निर्लज्ज तीन बार हँसाता है

साहित्य में शील हास्य का आलंबन माना जाता है। आतंकवाद की तत्कालीन घटना के बाद पता चला कि निर्लज्ज भी कैसे हास्य के आलंबन हो जाते हैं? और समझते हैं कि निर्लज्ज तीन बार हँसाता है, कैसे? सुना तो गोपियों…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

बोलो कैसे रह जाते हो तुम बिन बोले

बोलो कैसे रह जाते हो तुम बिन बोले जब कोई स्नेही द्वार तुम्हारे आकर तेरा हृदय टटोले। जब भी कोई पथिक हांफता, तेरे दरवाजे पर आए तेरे हृदय शिखर पर अपनी प्रेम-पताका फहराए, जब तेरी आतुरता में, कोई भी विह्वल…

Love Poems, Poetic Adaptation, Poetry, Ramyantar

तुम शायद झुंझला जाते हो!

प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: तीन A close capture of hand written love letters. तुम शायद झुंझला जाते हो! कर ही क्या सकती हूँ छोड़ इसे हे प्राणाधिक बतलाओ ना जाने भी दो कृपा करो अब रोष मुझे दिखलाओ ना…