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नवागत प्रविष्टियाँ

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रचना का स्वान्तःसुख, सर्वान्तःसुख भी है

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

बिना किसी बौद्धिक शास्त्रार्थ के प्रयोजन से लिखता हूँ अतः ‘हारे को हरिनाम’ की तरह हवा में मुक्का चला लेता…

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बहुत दूर नहीं, बहुत पास

Himanshu Pandey By Himanshu Pandey

(१) बहुत दूर नहींबहुत पास..कहकर तुमने बहका दियामैं बहक गया। (२)एक,दो,तीन…नहींशून्य मूल्य-सत्य हैकहाफिर अंक छीन लिएमैं शून्य होकर विरम गया।…